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Saturday, March 24, 2012

ईरान पर हमला करना क्यों जरूरी है-- दस समुचित कारण


  -- डेविड स्वांसन

1. अगर ईरान पर हमला किया गया तो वह जबाबी कार्रवाई करेगा, जो कि एक युद्ध अपराध होगा। और युद्ध अपराध के लिए सजा देना जरुरी है।

2. मेरे टेलीविजन ने कहा है कि ईरान के पास नाभिकीय हथियार हैं। मुझे पूरा यकीन है कि इस बार  तो यह बात सही है ही। यही बात उत्तरी कोरिया के मामले में भी सही है। हम केवल उन्ही देशों पर बमबारी करते हैं जिनके पास या तो सचमुच में नाभिकीय हथियार होते हैं या वे बुराई की धुरी होते हैं।
केवल इराक को छोड़कर, उसकी बात कुछ और थी।

3. इराक की हालत बहुत बुरी नहीं है। अगर इस बात को ध्यान में रखा जाए कि वहाँ की सरकार कितनी घटिया है, तो बहुत सारे लोगों के मरने या देश छोड़कर चले जाने के बाद वहाँ की स्थिति काफी बेहतर हो गयी है। यह सब नहीं हो पाता अगर हमने योजना के अनुसार काम न किया होता


4. जब हमने ईरान से तेल नहीं खरीदने की ध्मकी दी तो ईरान ने हमें तेल नहीं देने की धमकी दी, जो बिल्कुल भी बर्दाश्त से बाहर है। हम उस तेल के बिना क्या कर पायेंगे? और यदि वह बेचने पर राजी ही हो जाये, तो खरीदने से क्या फायदा?


5. 9/11 की घटना में ईरान का गुप्त रूप से हाथ था। मैंने इसे ऑनलाइन पढ़ा है। और अगर उसका हाथ नहीं था तो यह और भी बुरी बात है। ईरान ने सदियों से किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया, इसका मतलब ही है कि वह जल्द ही हमला करेगा।


6. अमरीकियों और इजरायलियों से भिन्न ईरानी कट्टर धर्मिक होते हैं ज्यादातर इजरायली ईरान पर हमला नहीं चाहते। पर वहाँ की पवित्र सरकार हमला चाहती है। इस फैसले का विरोध करना ईश्वर के विरूद्ध पाप है।

7. (अ) ईरानी इतने मूर्ख हैं कि जब हमने उसके वैज्ञानिकों की हत्या की तो उन्होंने टैक्सास में भाडे़ पर एक कार डीलर किया, ताकि मैक्सिको में भाडे़ पर एक नशीले पदार्थ की तस्करी करने वाले गिरोह को रखे, ताकि वाशिंगटन स्थित सउदी अरब के राजदूत की हत्या करेंऔर उन्होंने किया भी नहीं-- इतना कुछ इसलिए कि हम उनको पकडें और हमारी बदनामी हो। 

7. (ब) ओह! इन मूर्खों पर तो बमबारी कर देना चाहिये। वे सभ्य नहीं है।

8. युद्ध अमरीका की अर्थव्यवस्था के लिये फायदेमन्द है और ईरान के लिए भी। ईरान में मौजूद अमरीकी फौजी वहाँ का सामान खरीदेंगे। और जो महिलाएँ युद्ध के बाद जिंदा बचेंगी उनको ज्यादा अधिकार होंगे। जैसा वर्जीनिया में हुआ था। 1953 की उस छोटी सी दुर्घटना (अमरीका द्वारा ईरान की चुनी हुई मोशद्दक सरकार की तख्ता-पलट) के बाद हम ईरान के शुक्रगुजार हैं।


9. इस पूरे क्षेत्र को एकजुट करने का बस यही एक तरीका है। या तो हम ईरान पर बमबारी करें और वह हमारे प्रति शाश्वत प्रेम की पथ ले। या अगर जरूरी हो तो ईरान की मुक्ति के लिये हम उस पर कब्जा कर लें, जैसे हमने उसके पडोसी दे के साथ किया। इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। देखिए तो सही, अपफगानिस्तान की हालत कितनी अच्छी है।


10. वे हमारा ड्रोन वापस नहीं दे रहे हैं। अब बहुत हुआ।
(डेविड स्वांसन कई युद्ध-विरोधी पुस्तकों के लेखक और सक्रीय कार्यकर्ता हैं वे ऑनलाइन कार्यकर्ताओं की संस्था ( www://rootsanction.org ) में काम करते हैं यह लेख काउंटरपंच से लेकर अनूदित  गया है।)

Thursday, October 13, 2011

अमरीका का नया आत्मघाती पैंतरा

- दिगम्बर

अमरीका का नया पैंतरा। उसने ईरान पर सऊदी अरब के राजदूत की हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस मामले में ईरान के ख़िलाफ़ सभी विकल्पों को खुला रखने और ईरान के ख़िलाफ़ कठोर प्रतिबन्ध लगाने की भी घोषणा की है।
अमरीकी सरकार का दावा है कि उसने एक ऐसी साज़िश को विफल कर दिया है जिसका मकसद वॉशिंगट स्थित सऊदी अरब के राजदूत की हत्या करना था और जिसमें ईरानी सरकार की मिलीभगत थी. 11 अक्टूबर को न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत ने इस मामले में दो ईरानी नागरिकों पर सऊदी अरब के वाशिंगटन स्थित राजदूत की हत्या के षडयंत्र का आरोप लगाया है.
ईरान ने कहा है कि ये आरोप मनगढ़ंत हैं.
राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि जब तक अमरीकी सरकार को यह मालूम न हो कि वह अपने आरोपों को किस तरह से साबित कर सकती है, तबतक वह ऐसा कोई मामला सामने नहीं लाती. याद रहे कि अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पावेल ने 2003 में संयुक्त राष्ट्र संघ के आगे ऐसा ही खोखला दावा किया था कि अमरीका के पास सद्दाम हुसैन द्वारा व्यापक जनसंहार के हथियार बनाने के पक्के सबूत हैं. आगे चल कर अमरीका ने इसी झूठ का सहारा लेते हुए इराक पर वहशियाना जुल्म ढाये, जो आज भी जारी है. ईरान के पास नाभकीय हथियार होने के अमरीकी आरोप भी झूठे साबित हुए हैं.
अमरीका का कहना है कि ईरान सरकार को इस मामले की जानकारी चाहे नहीं भी रही हो, लेकिन ईरान की सरकार में शामिल किसी व्यक्ति की ऐसी गतिविधियों की जवाबदेही उसी की है. यह तर्क कुछ वैसा ही है जैसे लोक कथाओं के बाघ ने मेमने को सोते का पानी गन्दा करने का आरोप लगाया. मेमने ने कहा की मैं तो सोते के नीचे हूँ , भला यहाँ से मैं पानी कैसे गंदा कर सकता हूँ? इस पर बाघ ने कहा कि तुमने नहीं तो तुम्हारे किसी रिश्तेदार ने गन्दा किया होगा.
उधर अल जजीरा ने इस पूरे मामले की बखिया उधेड़ते हुए इसे किसी जासूसी सिनेमा का कथानक बताया है. अमरीका ने ईरानी नागरिकों पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री करनेवाले एक अमरीकी अपराधी की मदद से मक्सिको के लॉस जेतास गैंगस्टरों को सउदी राजदूत की हत्या का ठेका दिया था. नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों की मुखबिरी करनेवाले इस शख्स ने बताया था की उसके चाचा के एक ईरानी दोस्त महबूब अरबाबसियर ने यह कम सौंपा था। अब तो बस इतना ही करना था की इस किस्से की तार ईरानी रिवोलुश्नरी गार्ड कोर (कुद्स) से जोड़ दिया जाय और ईरान पर 'कड़ी कार्रवाई' का तर्क तैयार. मजेदार बात यह की एफबीआई के निदेशक ने अपने बयान में भी यही बात कही है – “इस साजिश का प्लाट किसी हालिउड फिल्म की पटकथा जैसा है।”
असमाधेय और गहराते आर्थिक संकट तथा वालस्ट्रीट पर कब्ज़ा करो आंदोलन की दोहरी मार झेल रही अमरीकी सरकार की यह ड्रामेबाजी कोई अनोखी बात नहीं. पहले भी वह अपने इशारे पर नाचने से इनकार करने वाले देशों के ऊपर ऐसे ही मनगढंत आरोप लगा कर धौंसपट्टी करता रहा है.
वाल स्ट्रीट पर कब्ज़ा करो आन्दोलन जिस तरह अमरीकी साम्राज्यवाद के कुकर्मों का पर्दाफाश कर रहा है और जिस तरह अरब दुनिया की जनता अपने तानाशाहों के खिलाफ सडकों पर उतर रही है, उससे ध्यान भटकने के लिए अमरीकी शासकों की और से किसी उन्मादी कार्रवाई को अंजाम दिया जाना कोई अचरज कि बात नहीं.
लाखों करोड़ डालर का कर्ज लेकर दुनिया की निहत्थी और बेकसूर जनता पर कहर बरपा करने, अपने देश की जनता को कंगाली में धकेलने, नाक तक कर्ज में डूबने और अपनी साख गवां चुकने के बावजूद अभी अमरीकी शासकों का कलेजा ठंडा नहीं हुआ. वियतनाम की लड़ाई में मात खाने तथा इराक और अफगानिस्तान में करारी हार से उसने कुछ सबक नहीं ली. अमरीका की नब्बे फीसदी जनता और पूरी दुनिया की जनता के दिलों में अमरीकी दरिंदगी के खिलाफ जो लावा जमा हुआ है, वह उसे खाक में मिलाएगी, ये तय है. बस समय की बात है.