Tuesday, July 10, 2012

ग्लैक्सो-स्मिथक्लीन पर धोखाधड़ी के जुर्म में 3 अरब डॉलर का जुरमाना




रायटर्स की एक रपट के मुताबिक ब्रिटिश दवा कम्पनी ग्लैक्सो-स्मिथक्लीन ने अपने घटिया कुकृत्य के लिए लगाये गए एक आपराधिक आरोप को स्वीकारने और 3 अरब डालर का जुर्माना भरने पर सहमति दे दी है, जिसे अमरीकी अधिकारी वहाँ के इतिहास में स्वास्थ्य सम्बंधी धोखाधड़ी का सबसे बड़ा मामला बताते हैं.

अमरीकी न्याय विभाग की जाँच के मुताबिक ग्लैक्सो ने पैक्सिल नामक अवसादरोधी दवा बिना मंजूरी लिए 18 साल से कम उम्र के रोगियों को बेंची जो केवल वयस्कों के लिए मान्य थी. वजन घटाने और नपुंसकता का इलाज करने के नाम पर उसने वेल्बुट्रिन नाम की ऐसी दवा बेंची जिसे इन कामों के लिए प्रयोग की अनुमति नहीं मिली थी.

अभियोक्ताओं के मुताबिक इन दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए ग्लैक्सो कम्पनी ने मेडिकल जर्नल का एक गुमराह करने वाला लेख बाँटा तथा डॉक्टरों को आलिशान दावत और स्पा उपचार जैसी सुविधाएँ मुहैया की जो गैरक़ानूनी रिश्वत जैसा ही है. इसके अलावा कंपनी के बिक्रय प्रतिनिधियों ने डॉक्टरों को हवाई द्वीप पर छुट्टी मनाने, मेडोना के कार्यक्रम का टिकट देने और सेमिनार का खर्चा उठाने पर करोड़ों डॉलर खर्च किये.

तीसरे मामले में कंपनी ने डायबिटीज की दवा अवान्डिया के बारे में अमरीकी खाद्य एवं औषधि विभाग को सुरक्षा डाटा नहीं दिया जो कानून के खिलाफ है. यह दुराचार ’90 के दशक से सुरु हो कर 2007 तक जारी रहा.

ग्लैक्सो कंपनी ने इन तीनों मामलों में आपराधिक अभियोगों को स्वीकारने पर अपनी सहमति दी है. यह मामला खास तौर से मायने रखता है, क्योंकि कारपोरेट दुराचार के मामलों में अपराध स्वीकारना बहुत ही दुर्लभ घटना हुआ करती है. इस इल्जाम का दायरा और अहमियत इतना बेमिसाल है कि अमरीकी अधिकारी इसे “ऐतिहासिक कार्रवाई” और “गैर कानूनी कामों में लिप्त कंपनियों के लिए साफ चेतावनी” बता रहे हैं.

समझौते में कम्पनी को एक अरब डॉलर का आपराधिक और दो अरब डॉलर का दीवानी जुर्माना चुकाना होगा. इस मामले ने 2009 के उस फैसले को पीछे छोड़ दिया है जिसमें अमरीकी अदालत ने एक अन्य दवा कम्पनी फाइजर पर 13 दवाओं की अवैध बिक्री के अभियोग में 2.3 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था.

भारत में इन विदेशी बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों की आपराधिक गतिविधियों का तो कोई अंत ही नहीं है. दुनिया भर में प्रतिबंधित दवाएँ तथा गैरकानूनी और बिलाइजाजत दवाएँ यहाँ धडल्ले से बिकती हैं. जिन दवाओं का जानवरों पर परीक्षण करना भी विदेशों में वर्जित है, उनको यहाँ आदमी पर आजमाया जाता है. दवाओं की कीमत का तो कोई हिसाब ही नहीं. फिर भी यहाँ इन पर कोई अंकुश नहीं है. तय करना मुश्किल है कि इन मानवद्रोही कुकृत्यों के लिए इन विदेशी कंपनियों और हमारे देशी शासकों में से किसका अपराध ज्यादा संगीन है.

Monday, July 9, 2012

अमरीकी गैरबराबरी के बारे में कुछ निर्मम सच्चाइयाँ



अमरीका में गैरबराबरी के अध्ययन से कुछ ऐसे तथ्य उजागर होते हैं जिन पर विश्वास करना सचमुच कठिन है।

1. संयुक्त राज्य की कम्पनियाँ सबसे कम आय वाले 20 प्रतिशत अमरीकियों की तुलना में कुल मिलाकर बहुत ही कम प्रतिशत कर चुकाती हैं। 

2011 में कुल कॉरपोरेट मुनाफा 1970 अरब डॉलर था। जिसमें से कॉरपोरेटों ने 181 अरब डॉलर (9 प्रतिशत) संघीय कर और 40 अरब डॉलर (2 प्रतिशत) राज्य कर के रूप में अदा किया। यानी उनका कुल कर भार केवल 11 प्रतिशत था। सबसे गरीब 20 प्रतिशत अमरीकी जनता ने संघ, राज्य और स्थानीय निकायों को अपनी आमदनी का 17.4 प्रतिशत कर के रूप में चुकाया।

2. अत्यधिक मुनाफा और कर भुगतान से बचने वाले तकीनीकी उद्योग को सरकारी खर्च से चलने वाले अनुसंधान के जरिये खड़ा किया गया था।

तकनीकी क्षेत्र किसी अन्य उद्योग की तुलना में सरकारी अनुसंधान और विकास पर कहीं अधिक निर्भर रहे हैं। अमरीकी सरकार ने 1980 से ही तकनीक और संचार में बुनियादी शोधों के लिए लगभग आधे के बराबर वित्तीय सहायता मुहैया की। आज भी संघीय अनुदान विश्वविद्यालयों में होने वाले अनुसंधानों का लगभग 60 प्रतिशत खर्च वहन करता है।

आईबीएम की स्थापना 1911 में, हेवलेट्ट-पैक्कार्ड की 1947 में, इन्टेल की 1968 में, माइक्रोसाफ्ट की 1975 में, एप्पल और ओरेकल की 1977 में, सिस्को की 1984 में हुई थी। ये सभी सरकार और सेना के नवाचारों पर निर्भर थीं। अभी हाल ही में निगमित गूगल की शुरूआत 1996 में हुई, जिसका विकास रक्षा विभाग के अर्पानेट प्रणाली और नेशनल साईंस फेडरेशन के डिजिटल पुस्तकालय पहल के माध्यम से हुआ।

2011 में इन सभी कम्पनियों का सम्मिलित संघीय कर भुगतान महज 10.6 प्रतिशत था।

3. शेयर बाजार में वित्तीय उपकरणों के 10 हजार महाशंख (quadrillion, यानी 10 पर 23 शून्य वाला अंक) डॉलर की बिक्री पर कोई कर नहीं।

अंतरराष्ट्रीय भुगतान बैंक द्वारा प्रस्तुत 2008 की रिपोर्ट के मुताबिक कुल वार्षिक व्युत्पत्ति व्यापार 11.4 हजार महाशंख डॉलर था। इसी साल शिकागो वाणिज्यिक विनिमयन की रिपोर्ट के मुताबिक यह व्यापार 12 हजार महाशंख डॉलर था।

10 हजार महाशंख डॉलर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था (सकल विश्व वार्षिक उत्पाद) से 12 गुना से भी अधिक है। यह अमरीका के प्रत्येक आदमी को 30 लाख डॉलर देने के लिए यह पर्याप्त है। लेकिन एक मायने में यह असली मुद्रा नहीं है। इसमें ज्यादातर कम्प्यूटर के जरिये होने वाला एक प्रकार का ऊँची मात्रा का नेनोसेकेण्ड व्यापार है जिसने हमारी अर्थव्यवस्था को लगभग तबाह कर दिया है। इसलिए इसके ऊपर एक छोटा सा बिक्री कर पूरी तरह न्यायोचित है। लेकिन इस पर कोई बिक्री कर नहीं है।

आप बाहर जाकर जूता या आई फोन खरीदिए तो इसके लिए आपको 10 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री कर अदा करना होगा। लेकिन वॉलस्ट्रीट जाइये और दस लाख डॉलर के बेहद जोखिम भरे क्रेडिट डिफाल्ट स्वैप खरीदिये और शून्य प्रतिशत कर चुकाइये।

4. बहुत से अमरीकियों को देश की कुल आय में प्रति डॉलर पर एक सेंट हिस्सा मिलता है।

-श्वेत परिवारों के मालिकाने वाले प्रति डॉलर गैर आवासीय सम्पत्ति की तुलना में अश्वेत लोगों के पास महज एक सेन्ट की सम्पत्ति है।

- 0.1 प्रतिशत सबसे अमीरों की 1980 में जितनी सम्पत्ति थी उसमें चार गुने की बढ़ोत्तरी हुई। वहीं 90 प्रतिशत सबसे गरीबों की सम्पत्ति में एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई।     

-अमरीका की कुल वित्तीय प्रतिभूतियों (जैसे बॉण्ड) में नीचे के 90 प्रतिशत अमरीकियों का हिस्सा केवल डेढ़ प्रतिशत है बाकी 98.5 प्रतिशत ऊपर के 10 प्रतिशत अमीरों के कब्जे में है।

-बोईंग, डूपोन्ट, वेल्स फार्गो, वेरीजॉन, जनरल इलैक्ट्रिक्स और डॉव केमिकल्स से 2008-2010 में हुऐ कुल मुनाफे में से अमरीकी जनता को कर के रूप में केवल एक प्रतिशत प्राप्त हुआ।

5. हमारा समाज एक आदमी या एक परिवार को इतनी सम्पत्ति रखने की छूट देता है जितने से दुनिया के सभी भूखों को खाना खिलाया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के आकलन के मुताबिक दुनिया की भूखमरी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए 3 अरब डॉलर की जरूरत है। जबकि बहुत से अमरीकियों की निजी सम्पत्ति इस धन राशि से ज्यादा है।

दुनिया में 92.5 करोड़ लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार एक आदमी के भोजन के लिए एक साल में लगभग 100 डॉलर की जरूरत है। यानि इसके लिए कुल 92 अरब डॉलर की दरकरा है जो वालमार्ट के 6 उत्तराधिकारियों की सम्पत्ति के बराबर है।

अपमान की चरम सीमा

एक हेज फण्ड मैनेजर ने (जॉन पॉलसन) 2007 में एक वित्तीय कम्पनी (गोल्डमेन सैक्स) के साथ षडयंत्र करके जोखिम भरे सबप्राइम बंधक पत्र तैयार किये ताकि मकान की कीमतें गिरने का पूर्वानुमान करके अपने द्वारा तैयार किये हुए निश्चित तौर पर असफल वित्तीय उपकरण के ऊपर दाँव खेलने में वह दूसरे लोगों के पैसों का उपयोग कर सके। उसे इस सफलता पूर्वक खेले गये जुए में 3.7 अरब डॉलर की कमाई हुई। तीन साल बाद उसने 5 अरब डॉलर और बनाये जो वास्तविक दुनिया में 100000 स्वास्थ्य कर्मियों की तनख्वाह देने के लिए पर्याप्त होता।

मध्यम वर्गीय करदाताओं की और ज्यादा बेइज्जती के लिए पॉलसन की आय के ऊपर कर की दर महज 15 प्रतिशत थी। दुगनी बेइज्जती के रूप में वह चाहे तो इस सब पर कोई कर अदा नहीं करेगा क्योंकि हेज फण्ड के मुनाफे को अनिश्चित काल के लिए टाला या छुपाया जा सकता है। तिगुनी बेइज्जती, कि उसके लाभ का एक भाग खुद उन्हीं मध्यम वर्गीय करदाताओं के पैसे से हुआ जिसके जरिये उस (एआईजी) कम्पनी को डूबने से बचाया (बेल आउट) गया जिसे उस जुआरी को दाँव में जीता हुआ पैसा चुकाना था।

और जिन लोगों को हमने अपने हितों की रक्षा के लिए चुना वे इस बारे में कुछ भी कर पाने में अनिच्छुक या असमर्थ हैं।

(पॉल बॉकेट डीपॉल विश्वविद्यालय में आर्थिक असमानता विषय के अध्यापक हैं। वह सामाजिक न्याय और शैक्षणिक वेबसाइट (UsAgainstGreed.orgPayUpNow.org,RappingHistory.org) के संस्थापक हैं, और अमेरिकन वार: इल्यूजन एण्ड रियेलिटी(क्लैरिटी प्रेस) के सम्पादक और मुख्य लेखक हैं। काउन्टर पंच में प्रकाशित इस लेख का अनुवाद पारिजात ने किया है। )